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बुखार के लक्षण और प्रकार- Bukhar ke lakshan aur prakar

बुखार के लक्षण और प्रकार(फोटो:freepik)
बुखार के लक्षण और प्रकार(फोटो:freepik)
Ritu Raj
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बुखार आमतौर पर कीटाणुओं के संक्रमण से होता है। कुछ संक्रमणों में सफेद रक्त कोशिकाओं के साथ सम्पर्क से बुखार करने वाले पदार्थ पैदा होते हैं। ये पदार्थ मस्तिष्क के तापमान केंद्र को प्रभावित करते हैं और इससे बुखार हो जाता है। बुखार कई तरह से होता है। लू लगने से भी बुखार हो जाता है। बच्चों को ज्यादातर गर्मियों में भी बुखार हो जाते हैं। बुखार होने पर यह ध्यान देना जरूरी है कि वह कितना डिग्री है और उसकी प्रकृति कैसी है। इन दोनों के ही आधार पर बुखार को कुछ प्रकार में बांटा जाता है। बुखार की डिग्री के आधार पर उसे कम, मध्यम का और तेज़ की श्रेणियों में बांटा जाता है। जैसे 99 से 100 डिग्री फॉरेनहाईट तक के बुखार को कम बुखार, 100 से 103 डिग्री फॉरेनहाईट तक को मध्य दर्जे का और 103 डिग्री से ज़्यादा को तेज़ बुखार कहा जाता है।

बुखार के लक्षण और प्रकार- Bukhar ke lakshan aur prakar in Hindi

कंपकंपीवाला बुखार (shivering fever)

ऐसी स्थिती में ठंड लगने लगती है जिसकी वजह से कंपकंपी होती है। कंपकंपी आने पर मांसपेशियों में तेज और लगातार क्रिया होना, जिससे शरीर में गर्मी पैदा होती है। यह बुखार मलेरिया, पीपवाला संक्रमण, मूत्र मार्ग संक्रमण आदि में होता है।

निरंतर या उतार चढ़ाव होने वाला बुखार (persistent or fluctuating fever)

कई बार बुखार दिन-रात लगातार चलता रहता है। टाइफॉइड में लगातार बुखार रहता है, फ्लू आदि में भी ऐसा ही बुखार देखने को मिलता है। बुखार में उतार चढ़ाव दिन में 1-2 बार आता है और कुछ घंटों के बाद अंशत: या पूर्ण रूप से उतर जाता है। लेप्टोस्पायरॉसिस वाला बुखार उतरता है, लेकिन पूर्ण रुप से सामान्य नहीं होता है।

चिरकारी बुखार (chronic fever)

लंबे समय तक चलने वाले बुखार को चिरकारी बुखार कहते हैं। ये कई हफ्तों और महीनों तक चलता है। ये चिरकारी बीमारियों जैसे तपेदिक में होता है। इसके अलावा कई बीमारियों (जैसे तीव्र मलेरिया में) इलाज न होने से भी चिरकारी बुखार हो जाता है।

रुक-रुक कर होने वाला बुखार (intermittent fever or fluctuating fever)

रुक-रुक कर होने वाला बुखार बार-बार बढ़ जाता है और फिर सामान्य हो जाता है। ये रोज़ हो सकता है या फिर उससे ज़्यादा अवधि में हो सकता है।

लगातार रहने वाला बुखार (persistent fever)

लगातार रहने वाला बुखार बीमारी के साथ चलता है। मोतीझरा (टॉयफाइड), मस्तिष्कावरण शोथ और प्रमस्तिष्क के मलेरिया में इस तरह का बुखार होता है।

अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्पोर्ट्सकीड़ा हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।


Edited by Ritu Raj
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