अपने भारतीय ओलंपियन को जानें: सविता पूनिया (गोलकीपर, महिला हॉकी)

सविता पूनिया भारत की मुख्य डिफेंडर और गोलकीपर हैं। वें अपने काम में सबसे अच्छी हैं। 36 साल बाद महिलाओं की हॉकी टीम ने ओलंपिक्स के लिए क्वालीफाई किया है और उस टीम की गोलकीपर के रूप में पूनिया को चुना गया है। ये रहे उनसे जुड़ी 10 बातें जिन्हें आप शायद न जानते हों:

  1. हरियाणा के सिसार में जोधकां गांव में 11 जुलाई 1990 को सुनीता पूनिया का जन्म हुआ था। वे ऐसे राज्य से हैं जहां महिलाओं/लड़कियों को आगे बढ़ने के ज्यादा मौके नहीं दिए जाते। ऐसे में सुनीता को अपने सपने पूरे करने के लिए कई बाधाओं को पार करना पड़ा।
  2. 8 साल पहले 18 साल की उम्र में उन्होंने देश का प्रतिनिधत्व करना शुरू कर दिया। उनके पिता महिंदर सिंह ने उन्हें ये खेल खेलने के लिए कहा और उसके बाद सुनीता हिसार के SAI अकादमी से जुड़ गई। उनके कोच सुंदर सिंह खरब ने उन्हें गोलकीपिंग करने लगाया और उन्हें उम्मीद थी की वे अच्छी गोलकीपर बनेंगी। "मेरे पास एक डायरी हुआ करती थी, जिसमें मैं हमेशा लिखती थी की मुझे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलूंगी। फिर 2007 में जब मैंने राष्ट्रीय कैंप में पहुंची तो ममता खरब दीदी, सुरेंद्र कौर दीदी और सबा अंजुम दीदी से बात कर के मुझे मदद मिली।"
  3. उनकी गोलकीपिंग की काबिलियत और छोटी उम्र में दिखाई बुद्धि तत्परता ने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। इससे उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली। 2009 के जूनियर एशिया कप में कांस्य पदक जीतनेवाली टीम का हिस्सा थी सुनीता पूनिया।
  4. भारतीय महिला टीम की मुख्य सादस्य होने के बावजूद वें अपने माता-पिता पर पैसों के लिए निर्भर हैं। हरयाणा के "मेडल लाओ, नौकरी पाओ" स्कीम के तहत, वे आज भी नौकरी की उम्मीद में हैं जो उन्हें अबतक नहीं मिला। " मुझे सरकारी अफसरों से पिछले तीन साल में केवल आश्वासन ही मिला है, और कुछ नहीं।"
  5. टीम में सविता का स्थान गोलकीपर का है और पिछले कई मौकों पर उन्होंने अहम गोल होने बचाएं हैं। देश के लिए उन्होंने 121 मेच खेला है।
  6. साल 2013 में मलेशिया में आयोजित एशिया कप के आठवें संस्करण में सुनीता पूनिया ने पेनल्टी शूट आउट के समय दो अहम गोल बचाकर टीम को कांस्य पदक दिलवाया।
  7. बेल्जियम में हुए हॉकी वर्ल्ड लीग में उनका प्रदर्शन अच्छा था और उनके कारण 38 टीमों में से भारतीय टीम को पांचवां स्थान मिला। इसी के कारण भारतीय महिला टीम ने 36 साल बाद ओलंपिक्स के लिए क्वालीफाई किया। "आज के समय में बिना नौकरी के गुजारना मुश्किल काम है। भारत के लिए खेलने के बावजूद मुझे मेरे परिवार के सहारे रहना पड़ता है। इस उम्र में मुझे उनका ध्यान रखना चाहिए, लेकिन यहां पर उसका उल्टा हो रहा है।"
  8. साल 2015 में दूसरे हॉकी वार्षिक सम्मान समारोह में पूरी टीम को सम्मानित किया गया था। टीम ने ओलंपिक्स के लिए क्वालीफाई किया जहां पर सुनीता पूनिया का स्वार्थरहित काम मददगार साबित हुआ। इसलिए उन्हें 1 लाख रुपये से सम्मानित किया गया।
  9. कई अंतराष्टीय स्तर पर उनके कमाल की गोलकीपिंग के कार्य के लिए उन्हें हॉकी वार्षिक सम्मान समारोह में उन्हें बलजीत सिंह गोलकीपर 'ऑफ़ द ईयर' का पुरुस्कार दिया गया।
  10. साल 2016 में न्यूजीलैंड में हुए हॉक्स बे कप में उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया। भारतीय महिला टीम को यहां पर छठा स्थान मिला। ऑस्ट्रलिया के खिलाफ उनका प्रदर्शन काफी अच्छा था। उन्होंने मैच में मजबूती से विरोधियों का सामना किया और उन्हें एक भी गोल नहीं करने दिया। उनके इस काम के लिए उनकी सराहना की गयी। जापान के खिलाफ पांचवें स्थान के मैच के लिए उन्होंने क़रीब आधे दर्जन गोल रोके जिसमें से 5 पेनल्टी कॉर्नर थे। भारत ने ये मैच 1-0 से जीता। "उन्होंने एक ड्रैग फ्लिक और तीन स्लैप शॉट का इस्तेमाल किया। इसपर हमने पहले चर्चा की थी। उनके हाव भाव देखकर ये समझा जा सकता है। मुझे पता था उनकी नंबर 2 शिहो सकई ड्रैग फ्लिक का इस्तेमाल करेंगी और 13 नंबर की खिलाडी शिहोरी ओइकवा और 17 नंबर की खिलाडी हज़ूकी नागी स्लैप शॉट का इस्तेमाल करेंगी।"
लेखक: तेजस, अनुवादक: सूर्यकांत त्रिपाठी
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