आज के दिन: 2000 में कर्णम मल्‍लेश्‍वरी ओलंपिक मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट बनी थीं

कर्णम मल्‍लेशवरी (दाएं)
कर्णम मल्‍लेशवरी (दाएं)

आज के दिन 2000 में भारोत्‍तोलक कर्णम मल्‍लेशवरी ओलंपिक में पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला एथलीट बनी थीं। 2000 सिडनी ओलंपक्सि में कर्णम मल्‍लेशवरी ने स्‍नैच और क्‍लीन एंड जर्क में 110 किग्रा व 130 किग्रा वजन उठाया था। कुल 240 किग्रा का वजन उठाने वाली कर्णम मल्‍लेशवरी ने ब्रॉन्‍ज मेडल जीतकर इतिहास रचा था।

इस ऐतिहासिक दिन को याद करते हुए पूर्व भारोत्‍तोलक ने ट्विटर पर लिखा, '20 साल पहले सिडनी 2000। भारतीय तिरंगे को देखने के लिए गौरव, सम्मान और गर्व का क्षण, भारत की पहली महिला ओलंपिक पदक विजेता के रूप में इतिहास बना। मेरे परिवार, कोच और देश का पसीना और आशीर्वाद।'

ऐतिहासिक उपलब्धि ने कर्णम मल्‍लेशवरी को हर घर में पहचान दिलाई और लोग उन्‍हें 'द आयरन लेडी' के नाम से बुलाने लगे। कर्णम मल्‍लेशवरी अब भी ओलंपिक मेडल जीतने वाली एकमात्र भारतीय महिला भारोत्‍तोलक हैं। लंबी सफलता आने से पहले कर्णम मल्‍लेशवरी 1992 विश्‍व चैंपियनशिप्‍स में तीसरे स्‍थान पर थी। इसके बाद 1994 और 1995 में उन्‍होंने 54 किग्रा वर्ग में विश्‍व खिताब जीते। फिर 1996 में वह दोबारा तीसरे स्‍थान पर रहीं। 1994 और 1998 में कर्णम मल्‍लेशवरी एशियाई गोल्‍ड मेडल जीतने से चूक गई और उन्‍हें सिल्‍वर मेडल से संतोष करना पड़ा।

सफलता से लय बनी और कर्णम मल्‍लेशवरी ओलंपिक्‍स के लिए सिडनी गईं। जहां उन्‍होंने ब्रॉन्‍ज मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया, वहीं कर्णम मल्‍लेशवरी को एक बात का मलाल भी था। कर्णम का मानना था कि भारतीय कैंप में गलत कैल्‍क्‍यूलेशन के कारण वह गोल्‍ड मेडल जीतने से चूक गईं। कर्णम मल्‍लेशवरी को नहीं बताया गया था कि उन्‍हें पोडियम में नंबर-1 की जगह पर खड़े होने के लिए ज्‍यादा वजन उठाने की जरूरत है।

कर्णम मल्‍लेशवरी की वापसी पर लगी रोक

कर्णम मल्‍लेशवरी ने 2002 कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स में वापसी करने की योजना बनाई थी। हालांकि, दुर्भाग्‍यवश उनके पिता का देहांत हो गया और इससे कर्णम की वापसी पर पानी फिर गया। कर्णम मल्‍लेशवरी ने एक बार फिर वापसी करने की कोशिश की। ग्रीस में 2004 ओलंपिक्‍स में उन्‍होंने वापसी की कोशिश की, लेकिन प्रेरणादायी नतीजे नहीं मिलने के बाद उन्‍होंने आखिरकार संन्‍यास लेने का फैसला किया।

इस बीच कर्णम मल्‍लेशवरी को भारतीय सरकार द्वारा कई प्रतिष्ठित अवॉर्ड से सम्‍मानित किया गया। 1994 में अर्जुन अवॉर्ड, 1999 में राजीव गांधी खेल रत्‍न पुरस्‍कार और 1999 में पद्म श्री पुरस्‍कार से कर्णम मल्‍लेशवरी को सम्‍मानित किया गया। इसके अलावा मल्‍लेशवरी ने कर्णम मल्‍लेशवरी फाउंडेशन की स्‍थापना की जो भारोत्‍तोलक और पावरलिफ्टिंग एकेडमी है ताकि भारत में इस खेल का प्रसार हो सके।

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