हरदीप सिंह के बारे में 7 रोचक बातें जो आपके लिए जानना है जरुरी

2016 रियो ओलंपिक्स में भारतीय रेसलिंग दल से पदक के कई दावेदार शामिल हैं। दल में फ्रीस्टाइल और ग्रीको-रोमन वर्ग के कई प्रतिनिधित्व करने वाले रेसलर शामिल हैं जो अपने प्रदर्शन से प्रभावित करने के लिए बेक़रार हैं। पुरुष वर्ग में पांच और महिला वर्ग में तीन पहलवानों के रहने से रेसलिंग दल में मिश्रण अच्छा है। हरदीप सिंह ओलंपिक्स में अपना डेब्यू करने जा रहे हैं और उनके बारे में 7 बातें ऐसी हैं जो आप जरुर जानना चाहेंगे। वह पदक के उम्मीद्वारों में से एक हैं। 1) हरदीप का जन्म हरियाणा स्थित जींद जिला के दाहोला गांव के किसान के घर हुआ। 2) स्कूल में पढ़ते समय से ही रेसलिंग हरदीप का जुनून था। बाद में उन्होंने इसे गंभीर रूप से अपनाया और जीरकपुर में अभ्यास शुरू किया। फिर उन्होंने दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में अभ्यास प्रारंभ किया। 3) वह 2008 ओलंपिक्स में देश का प्रतिनिधित्व करने के सपने को पूरा करने से चूक गए थे, क्योंकि उनके पिता ने एक घटना में अपना पैर गंवा दिया था। तीन भाइयों में सबसे बड़े होने के नाते हरदीप घर के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उन्होंने परिवार की देखभाल की और अपने खेल पर भी ध्यान बरकरार रखा। 4) हरदीप का रिकॉर्ड अब तक शानदार रहा है, उन्होंने विश्व में कई टूर्नामेंट जीते। जेएसडब्लू एक्सीलेंस प्रोग्राम से समर्थन प्राप्त ग्रेप्लर ने 2013 कॉमनवेल्थ रेसलिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था। तब उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के जूलियन लाबुसचाग्ने को 96 किग्रा ग्रीको-रोमन वर्ग के फाइनल में पटखनी दी थी। इसी टूर्नामेंट में 96 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में उन्होंने कांस्य पदक जीता। उन्होंने अप्रैल में 2014 एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप्स में भाग लिया और टूर्नामेंट में पांचवे स्थान पर रहे। सिंह ने 2014 में वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप्स में भी हिस्सा लिया, लेकिन क्वालीफाइंग राउंड जीतने के बाद उन्हें एस्तोनिया के अर्डो अरुस्सर से शिकस्त झेलना पड़ी। वर्ष 2015 हरदीप के लिए सबसे शानदार रहा। उन्होंने नेशनल टूर्नामेंट्स में दो स्वर्ण पदक जीते। एक 35वें राष्ट्रीय गेम्स में और दूसरा 60वें राष्ट्रीय रेसलिंग चैंपियनशिप में। इस वर्ष की शुरुआत में बेंगकोक में संपन्न 2016 एशियन चैंपियनशिप्स में 98 किग्रा ग्रीको-रोमन स्पर्धा में हरदीप ने रजत पदक जीता। 5) मनप्रीत कौर, मनोज कुमार और अन्य 35 भारतीय रेलवेज के एथलीटों में से एक हैं हरदीप जो ओलंपिक्स में भाग ले रहे हैं। भारतीय रेलवेज ने रियो में हिस्सा ले रहे 35 एथलीटों में से विजेताओं के लिए इनामी राशी की घोषणा कर रखी है। 6) नियम के मुताबिक भारतीय एथलीट रेसलिंग की ग्रीको-रोमन स्टाइल में ज्यादा अच्छा प्रदर्शन नहीं करते क्योंकि यह खेल पूरी तरह शरीर के ऊपरी भाग की मजबूती पर आधारित है। इसमें भारतियों पर अधिकांश यूरोपियाई पहलवान भारी पड़े हैं। जेएसडब्लू स्पोर्ट्स एक्सीलेंस प्रोग्राम के सदस्यों को भरोसा है कि हरदीप सब पर भारी पड़ते हुए रियो में सफलता हासिल करेंगे। 2004 के बाद से ग्रीको-रोमन वर्ग में क्वालीफाई करने वाले पहले भारतीय हरदीप अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित करना चाहेंगे क्योंकि ओलंपिक्स में वह अपना डेब्यू भी करेंगे। 7) हरदीप सिंह ने अपना करियर फ्रीस्टाइल रेसलर के तौर पर शुरू किया था, लेकिन कोच की सिफारिश के बाद 2009 में उन्होंने ग्रीको-रोमन स्टाइल का रुख कर लिया। उन्हें अपनी रेसलिंग की स्टाइल आधुनिक बनाने में 7 वर्ष ही हुए हैं, लेकिन उनकी प्रगति ने दर्शाया कि वह बहुत अच्छे हैं और देश को 2016 रियो ओलंपिक्स में पदक दिला सकते हैं।