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नीतू को बॉक्सर बनाने के लिए पिता ने नौकरी तक दांव पर लगा दी, बेटी ने कॉमनवेल्थ गोल्ड जीत कर किया कमाल

बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में फाइनल बाउट जीतने के बाद विजेता नीतू का हाथ उठाती रेफरी।
बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में फाइनल बाउट जीतने के बाद विजेता नीतू का हाथ उठाती रेफरी।
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Hemlata Pandey

21 साल की नीतू ने कॉमनवेल्थ गेम्स में महिला बॉक्सिंग का 48 किलोग्राम गोल्ड जीत देश को इस बार मुक्केबाजी का पहला गोल्ड दिलाया। दो बार की विश्व यूथ चैंपियन नीतू इंग्लैंड की डेमी-जेड को एकतरफा मैच में 5-0 से हराया। नीतू की उपलब्धि के बाद देशभर में खुशी का माहौल है, लेकिन इस मुक्केबाज का ये मेडल सिर्फ उनकी मेहनत की बदौलत नहीं है बल्कि उनके पिता भगवान दास के संघर्ष का नतीजा है जिन्होंने बेटी नीतू को बॉक्सर बनाने के लिए अपनी नौकरी तक दांव पर लगा दी।

While our Hockey women were clinching Bronze, Nitu Ghangas went all out against the Home Crowd and clinched a Gold! 🇮🇳#CWG2022 #B2022 https://t.co/C0iSzYTT92

नीतू हरियाणा के भिवानी की रहने वाली हैं। नीतू के पिता जय भगवान हरियाणा विधानसभा में बेल मेसेंजर का काम करते हैं। बेटी को बॉक्सर बनाना पिता का ही सपना था। साल 2012 में जब नीतू ने बॉक्सिंग करनी शुरु की तो वह अपने गांव धनाना से भिवानी जाती थीं जहां मशहूर कोच जगदीश सिंह की अकादमी थी। रोज नीतू को 20 किलोमीटर का सफर तय कर अकादमी जाना होता था, साथ में पिता जाते थे। ऐसे में जब नौकरी के साथ बेटी को अकादमी ले जाना कठिन होने लगा तो जय भगवान ने बड़ा फैसला लेते हुए Leave without Pay ली यानि बिना तन्ख्वाह के छुट्टी पर चले गए।

Congratulations to Nitu Ghanghas for a hard earned and well deserved Gold medal in Boxing at CWG 2022. She has pursued sports diligently and with utmost passion. Her success is going to make Boxing more popular. My best wishes for her future endeavours. #Cheer4India https://t.co/sIEzPGnRaY

कोच जगदीश ने नीतू में स्ट्रेट पंच लगाने की गजब क्षमता देखी और उसे और अन्य लड़कियों को सीनियर पुरुष बॉक्सर्स के साथ ट्रेन किया। नीतू शुरुआत से ही बॉक्सिंग की ट्रेनिंग पूरे दिल से करती थीं, और बाउट प्रैक्टिस के बाद नॉर्मल प्रैक्टिस में तुरंत लग जाती थी। शुरुआती टूर्नामेंट में नीतू अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रही थीं और साल 2015 में उन्हें पेट में चोट भी लगी। नीतू के इलाज के लिए पिता ने न सिर्फ रिश्तेदारों से कर्ज लिया बल्कि कार भी बेच दी। लेकिन नीतू ने वापसी कर अगले साल भोपाल में नेशनल कैम्प में जगह बना ली। नीतू की ट्रेनिंग और डाइट का खर्चा अब कैम्प में मुफ्त था ऐसे में भगवान सिंह से थोड़ा बोझ कम हुआ। लेकिन बेटी का साथ देने के लिए पिता भोपाल में किराए के मकान में रहने लगे।

2017 में नीतू ने गुवाहाटी में विश्व यूथ चैंपियनशिप का गोल्ड जीता। पिछले साल नीतू 48 किलो वेट कैटेगरी की नेशनल चैंपियन बनीं। इस साल विश्व चैंपियनशिप में क्वार्टरफाइनल बाउट से पहले नीतू बीमार पड़ गईं और मेडल से चूक गई। नीतू ने कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए हुए ट्रायल्स में 2019 की विश्व चैंपियनशिप सिल्वर मेडलिस्ट मंजू रानी को मात दी। इस क्वालिफिकेशन के दूसरे दौर में वो एमसी मैरी कॉम से भिड़ीं लेकिन मैरी कॉम चोट के कारण मैच से हट गईं। मैरी कॉम ने नीतू के खेल की तारीफ की और ये नीतू के लिए बहुत बड़ी बात थी क्योंकि मैरी कॉम उनकी आदर्श हैं।

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पिछले दो सालों में नीतू ने काफी मेहनत कर प्रतियोगिताओं को जीतकर इनामी धनराशि कमाई और अपनी छोटी बहन की एमबीबीएस की पढ़ाई में पिता की मदद कर रही हैं। उनका छोटा भाई भी निशानेबाजी की ट्रेनिंग कर रहा है। नीतू ने अब कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतकर ये सुनिश्चित कर लिया है कि घर की वित्तीय हालत और अच्छी हो जाएगी। लेकिन नीतू के इस पूरे सफर में उनके पिता ने जो भूमिका निभाई है वो प्रेरणादायक है।


Edited by निशांत द्रविड़
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