Create

अचिन्त श्यूली : बड़े भाई ने खुद का वेटलिफ्टिंग करियर छोड़ छोटे भाई को बनाया चैंपियन

कॉमनवेल्थ खेल 2022 में अपने वेटलिफ्टिंग गोल्ड के साथ अचिंत।
कॉमनवेल्थ खेल 2022 में अपने वेटलिफ्टिंग गोल्ड के साथ अचिंत।
Hemlata Pandey

वेटलिफ्टर अचिंत श्यूली ने बर्मिंघम कॉमनवेल्थ खेलों में देश को तीसरा गोल्ड मेडल दिलवाया और सभी का दिल जीत लिया। 20 साल के अचिंत ने 73 किलोग्राम भार वर्ग में 313 किलो वजन उठाया और नया गेम्स रिकॉर्ड बनाते हुए गोल्ड अपने नाम किया। लेकिन अचिंत आज इस मुकाम पर नहीं खड़े होते अगर 7 साल पहले उनके बड़े भाई आलोक ने अपना करियर दांव पर नहीं लगाया होता।

Achinta Sheuli smashes the Games Record in Snatch and Combined Lifts to win India's 3rd Gold Medal at the Commonwealth Games 2022. 🔥#CWG2022 #B2022 https://t.co/PC8nTfFV2V

मूल रूप से पश्चिम बंगाल के देउलपुर के रहने वाले अचिंत का बचपन गरीबी में बीता। पिता रिक्शा चलाकर परिवार का पेट पालते थे तो घर पर अचिंत कपड़ों पर जरी की बुनाई कर छोटी उम्र में ही परिवार का हाथ बंटाते थे। घर पर मुर्गियां भी पाली थीं ताकि थोड़ी आमदनी और हो सके। अचिंत के बड़े भाई आलोक ने आस-पास के नौजवानों को देख वेटलिफ्टिंग करनी शुरु की। अचिंत ने भी 12 साल की उम्र में बड़े भाई के साथ नजदीकी जिम जाना शुरु किया। अचिंत में काफी हुनर था। एक साल के अंदर ही अचिंत के पिता का मृत्यु हो गई। परिवार को गहरा झटका लगा। अचिंत उस समय 8वीं क्लास में थे।

अचिंत ने 2019 और 2021 की कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप्स में लगातार गोल्ड जीता है।
अचिंत ने 2019 और 2021 की कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप्स में लगातार गोल्ड जीता है।

श्यूली परिवार में पैसों की किल्लत हुई तो अचिंत के बड़े भाई आलोक ने बहुत ही अहम फैसला लिया। अचिंत को सुबह 5 बजे उठकर दौड़ के लिए जाना होता था, फिर घर आकर बुनाई करनी होती थी, इसके बाद पास के जिम जाकर प्रैक्टिस और स्कूल जाना तथा फिर फिर ट्रेनिंग। आलोक ने छोटे भाई की ये हालत देख खुद वेटलिफ्टिंग छोड़ जरी के कपड़ों पर कारीगरी का काम शुरु कर दिया ताकि अचिंत को वेटलिफ्टिंग ना छोड़नी पड़े और घर पर पैसे आते रहें। आलोक भी आज शायद देश के लिए खेल रहे होते, लेकिन उन्होंने छोटे भाई को उड़ान के पंख दिए और आज उसी भाई ने परिवार समेत पूरे देश का मान बढ़ाया है।

अचिंत ने कॉमनवेल्थ खेलों में जीत के बाद अपने गोल्ड मेडल को कोच विजय शर्मा और भाई आलोक को ही समर्पित किया। अचिंत ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनके परिवार ने जिस परेशानी को देखा और झेला उसके बाद भाई की मदद के दम पर ही वो आज इस मुकाम पर हैं।


Edited by Prashant Kumar

Comments

Quick Links:

More from Sportskeeda
Fetching more content...