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क्या क्रिकेट को पछाड़ बैडमिंटन बन सकता है भारत का नंबर-1 खेल ?

इन दिनों अंतर्राष्ट्रीय खेल जगत में क्रिकेट के अलावा जिस खेल में भारत का कद तेजी से बढ़ रहा है, वो खेल है बैडमिंटन। बैडमिंटन में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दिन-प्रतिदिन भारतीय खिलाड़ी देश का परचम लहराने में लगे हुए हैं। आज बैडमिंटन में भारत का लोहा सारी दुनिया मान रही है। इसमें सबसे बडा योगदान पूर्व खिलाडी और वर्तमान में कई बड़े खिलाडियों के कोच पुलेला गोपीचंद का है। जिनकी कड़ी मेहनत और लगन ने भारतीय बैडमिंटन को ये बुलंदियां प्रदान की हैं। वैसे पिछले कुछ समय में जिस तरह से हैदराबाद शहर से बैडमिंटन में कई खिलाडी उभरकर सामने आये हैं, उसके बाद ये कहना कि हैदराबाद बैडमिंटन में भारत की राजधानी बन गया है गलत नहीं होगा। इन खिलाडियों में सबसे ऊपर नाम आता है, बैडमिंटन की दुनिया में सिल्वर गर्ल के नाम से मशहूर पीवी सिंधु का, सिंधु ने पिछले कुछ समय में दुनियाभर में अपनी धूम मचाई है। ओलम्पिक की रजत पदक विजेता पीवी सिंधु के नाम का डंका आज न सिर्फ भारत में बल्कि सारी दुनिया में ही बज रहा है। वर्तमान में विश्व की नंबर 3 रैंकिग वाली खिलाडी सिंधु ने इस वर्ष इंडिया ओपन, कोरिया ओपन, सैयद मोदी इंटरनेशनल टूर्नामेंट जैसे कई ख़िताब अपने नाम किये हैं, इसके अलावा वो विश्व चैम्पियनशिप सहित कुछ प्रतियोगिताओं में उपविजेता भी रहीं हैं। उनकी कामयाबी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता कि नंबर 2 की रैंकिग को छू चुकी सिंधु का इरादा शीघ्र ही नंबर वन बनने का है। बैडमिंटन के क्षेत्र में इस वर्ष जो दूसरा नाम तेजी से उभरा है, वो है के श्रीकांत। इस वर्ष श्रीकांत ने सारे विश्व में अपने नाम का लोहा मनवाया है। बैडमिंटन जगत में जितनी कामयाबी इस साल उन्हें मिली शायद ही किसी और को मिली हो। उन्होंने इस वर्ष इंडोनेशिया सुपर सीरीज, ऑस्ट्रेलियन सुपर सीरीज, डेनमार्क सुपर सीरीज, फ्रेंच सुपर सीरीज के ख़िताब जीतने में कामयाबी हासिल की है। इसके अतिरिक्त वो सिंगापुर ओपन में भी उपविजेता रहे हैं। वर्तमान समय में दुनिया के नंबर 3 खिलाडी श्रीकांत ने इसके अलावा सांई प्रणीत के साथ मिलकर डबल्स में सिंगापुर सुपर सीरीज का ख़िताब भी अपने नाम किया है। ओलम्पिक में भले ही उन्होंने कोई पदक न जीता हो, लेकिन उनका प्रदर्शन काफी अच्छा था। उन्होंने भी दुनिया का नंबर-1 खिलाडी बनने का सपना संजो रखा है। भारतीय बैडमिंटन को इनके अलावा विश्व की पूर्व नंबर वन साइना नेहवाल से भी बहुत उम्मीदें हैं। जो अपनी चोटों और खराब फॉर्म से उबरकर अंतर्राष्ट्रीय पटल पर फिर से अपनी छाप छोड़ने को व्याकुल हैं। इन तीनों के अतिरिक्त भी कई खिलाडियों ने हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। अगर हम बैडमिंटन में भारत के इतिहास पर नज़र डालें तो उसमें प्रकाश पादुकोण एक बड़ा नाम रहे हैं। जिन्होंने सबसे पहले अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करके भारत का परचम फहराया। वो आल इंग्लैंड ओपन चैम्पियनशिप का ख़िताब जीतने वाले पहले भारतीय थे। अन्य सफलताओं के अलावा उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स, वर्ल्ड कप में भी गोल्ड मेडल जीता था। उन्होंने ही बैडमिंटन में भारत की पहचान बनाई थी। उनके बाद सैयद मोदी भी बैडमिंटन में एक बड़ा नाम बनकर चमके थे। किन्तु दुर्भाग्यवश भली-भांति चमकने से पूर्व ही वक्त ने उन्हें हमसे छीन लिया। मृत्यु से पूर्व शानदार प्रतिभा के दम पर उन्होंने भारतीय बैडमिंटन को और ऊंचाइयों पर ले जाना शुरू कर दिया था। सैयद मोदी ने कई अन्य राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय खिताबों के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल और एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल भी जीता था। उनके जाने के बाद लगभग एक दशक तक कोई अन्य खिलाडी अपनी छाप छोड़ पाने में नाकाम रहा। इस ख़ामोशी को तोड़ा पुलेला गोपीचंद ने, उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाकर भारत में बैडमिंटन की परम्परा को और आगे बढ़ाया। उन्होंने राष्ट्र्मंडल खेलों में रजत पदक और कांस्य पदक जीतने के अलावा आल इंग्लैंड चैम्पियनशिप भी जीती। ऐसा करने वाले वो पादुकोण के बाद दूसरे भारतीय बने। इनके अलावा अभिन्न श्याम गुप्ता के रूप में भी एक प्रतिभा नज़र आयी, जिन्होंने फ्रेंच सुपर सीरीज जीतकर आशाएं जगाई थीं। लेकिन वो अपनी प्रतिभा के साथ पूरी तरह न्याय नहीं कर सके। उसके बाद फिर से कुछ समय के लिए भारतीय बैडमिंटन में शांति छा गई। एक बार फिर से कुछ समय तक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कोई भी भारतीय खिलाडी अपनी छाप छोड़ने में नाकाम रहा। इस बार इस शांति को भंग करने का जिम्मा उठाया साइना नेहवाल ने। साइना के पदार्पण के बाद तस्वीर में परिवर्तन आना शुरू हुआ। विश्व की पूर्व नंबर-1 खिलाडी साइना ने निरंतरता दिखाते हुए अंतर्राष्टीय प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन किया। ओलम्पिक में कांस्य पदक, राष्ट्रमण्डल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के अलावा भी अब तक वो 20 से भी अधिक अंतर्राष्ट्रीय ख़िताब अपने नाम कर चुकीं हैं। उनके आने के बाद भारतीय खिलाडियों के खेल में निरंतरता दिखाई दी। महिला बैडमिंटन में जहां एक तरफ डबल्स में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की जोड़ी ने अच्छा प्रदर्शन करना शुरू किया। वहीं दूसरी ओर पीवी सिंधु भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक नई सनसनी बनकर उभरीं। पिछले कुछ समय में जहां एक ओर महिला डबल्स में सावित्री और शकुंतला सिक्की जैसी खिलाडियों ने भी अपनी चमक दिखानी शुरू की है। वहीं दूसरी ओर पुरुषों में किदम्बी श्रीकांत, पी कश्यप, सांई प्रणीत, एच एस प्रणय, अजय जयराम, समीर वर्मा, सौरभ वर्मा, सात्विक सांईराज आदि खिलाडी भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर अपनी पहचान बनाने लगे हैं। इन खिलाडियों की मेहनत का ही नतीजा है कि आज दुनियाभर के सभी बड़े खिलाडी भारतीय बैडमिंटन को सम्मान की दृष्टि से देखते हैं। जिस तरह से भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, उसके बाद भारतीय खिलाडियों की और भारतीय बैडमिंटन की लोकप्रियता बढ़ना तो तय है। लेकिन ये कहना कि भारत जैसे देश में जहां क्रिकेट मात्र एक खेल नहीं है बल्कि एक धर्म है, हाल-फ़िलहाल तो किसी भी खेल का उसे पीछे छोड़ पाना आसान दिखाई नहीं देता।

Edited by Staff Editor
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