फिशर का आयुर्वेदिक इलाज- Fissure ka Ayurvedic ilaj

फिशर का बेहतरीन आयुर्वेदिक इलाज
फिशर का बेहतरीन आयुर्वेदिक इलाज

फिशर एक ऐसी समस्या है जिसका एहसास सुबह मल त्याग करते वक्त होगा। इस दौरान एक असहनीय दर्द होता है। ये समस्या आपके मल त्याग करने वाली जगह होता है तो ऐसे में लिहाजा लोग इसे बवासीर या पाइल्स समझ बैठते हैं। लेकिन, फिशर रोग इन सबसे अलग है। आयुर्वेद में इस गुदचीर या परिकर्तिका कहा जाता है। इस रोग के होने पर गुदा के आसपास वाली जगह पर चीरे जैसा लगता है जिसे फिशर कहते हैं।

फिशर के कारण |Causes of Anal Fissure

शरीर से संबंधित लगभग सारे रोग खानपान से ही जुड़े होते हैं। जब हम सही भोजन का चुनाव नहीं करते हैं तो कई सारी समस्याएं हो जाती है और इससे पेट की समस्या भी शुरू हो जाती है। फिशर की भी समस्या ज्यादातर कब्ज के चलते होने की संभावना ज्यादा रहती है। जिन लोगों को कब्ज की समस्या होती है, उनका मल कठोर हो जाता है और जब यह गुदा से निकलता है तो चीरा या जख्म बनाता हुआ निकलता है।

फिशर के लक्षण |Symptoms of anal fissure

मल त्याग के दौरान गुदाद्वार में तेज दर्द होना

कट लगने जैसा दर्द होना

2-3 घंटे तक लगातार रह सकता है दर्द

पूरे दिन भी रह सकते हैं परेशान

बैठने में मुश्किल

कभी-कभी गुदा में खुजली भी रहती है

फिशर का आयुर्वेदिक उपचार |Ayurvedic treatment for Fissure in hindi

जात्यादि तेल

जात्यादि तेल एक एंटीसेप्टिक, रोगाणुरोधी, एंटी प्रायटिक और घाव भरने में मदद करने वाला तेल है। ये गुदा क्षेत्र के आसपास खुजली, जलन और जलन को कम करता है। यह कठोर मल के गुजरने के कारण कटे-चीरे को ठीक करने में मदद करता है।

यष्टिमधु चूर्ण

आमतौर पर मुलेठी के रूप में जाना जाता है, यह एक एनाल्जेसिक एजेंट है। इसके साथ ही ये एक एंटासिड के रूप में भी काम करता है। ऐसे में फिशर की समस्या में होने वाले जलन से राहत दिलाने में आपकी मदद कर सकता है। नियमित रूप से इसके इस्तेमाल से फिशर की समस्या से जल्द ही छुटकारा मिल सकता है।

गंधक रसायन

गंधक रसायन अपने जीवाणुरोधी, एंटीवायरल और रोगाणुरोधी गुणों के लिए जाना जाता है, इसका उपयोग संक्रमण के दौरान हुए उसके प्रभाव को ठीक करने में किया जाता है। इनमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं जो गुदा क्षेत्र में सूजन को कम करने में मदद करते हैं।

त्रिफला गुग्गुलु

त्रिफला गुल्गुलु में एनाल्जेसिक और कब्ज विरोधी गुण होते हैं। इसका इस्तेमाल गुदा विदर को ठीक करने में किया जाता है। आपको कब्ज के साथ-साथ फिशर के कारण होने वाले दर्द से भी राहत मिलेगी। इसके अलावा ये जड़ी बूटी मल को भी नरम करती है और संक्रमण से भी बचाती है। अगर आप पुरानी कब्ज के मरीज हैं तो आप त्रिफला गुग्गुलु की जगह गुलकंद या त्रिफला चूर्ण का इस्तेमाल कर सकते हैं।

अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें। स्पोर्ट्सकीड़ा हिंदी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

Edited by Ritu Raj
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