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वीरेंदर सहवाग (Virender Sehwag)


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दिल्ली में जन्मे वीरेंदर सहवाग को दुनिया के महान बल्लेबाज के रूप में जाना जाता है। वो भारतीय टीम के बेहद आक्रामक सलामी बल्लेबाज थे। वो राइट आर्म ऑफ ब्रेक गेंदबाज भी थे। सहवाग ने अपने करियर में भारतीय टीम, एशिया इलेवन, दिल्ली, दिल्ली डेयरडेविल्स, आईसीसी वर्ल्ड इलेवन, इंडिया ब्लू, किंग्स इलेवन पंजाब, लीसेस्टरशायर, मेरीलेबोन क्रिकेट क्लब, दिल्ली डेयरडेविल्स और किंग्स इलेवन पंजाब की तरफ से मैच खेले।






शुरुआत रही निराशाजनक

क्रिकेट की दुनिया से कोई ताल्लुक न रखने के बावजूद बल्लेबाजी के लिए उनका प्यार जगजाहिर था। वह जब सात महीने के थे तो उन्हें खिलौने के रूप में एक बैट मिला था। हालांकि, शुरुआत में घरवाले उनके क्रिकेट खेलने को लेकर खुश नहीं थे लेकिन क्रिकेट के प्रति उनके मजबूत इरादों को देखने के बाद सबने उनका समर्थन किया।


ग्रेजुएशन के दौरान सहवाग ने बेहतर क्रिकेट खेला। उन्हें 1997-1998 में दलीप ट्रॉफी के लिए उत्तर क्षेत्र क्रिकेट टीम में खेलने का मौका मिला। उस सीरीज में बेहतरीन प्रदर्शन के आधार पर उन्हें भारत की अंडर-19 टीम में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज खेलने को मिली। यहीं से उनकी जगह भारत की टीम के लिए बनी।


उन्हें वनडे डेब्यू करने का मौका मिला लेकिन दुर्भाग्य से एक रन बनाने के बाद ही वो आउट हो गए। उस मैच में उन्होंने 3 ओवर में 35 रन दिए, जिसकी वजह से वह 20 महीने तक भारतीय टीम से बाहर रहे। सहवाग ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 2001 के अंत में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया। उन्होंने टीम की हार के बावजूद 105 रन बनाए। 2007 विश्व कप के शुरुआत में सहवाग के अच्छे प्रदर्शन के बावजूद उन्हें टीम में नहीं लिया गया।


टेस्ट में तिहरा और वनडे में दोहरा शतक बनाया

सहवाग की कुछ उल्लेखनीय तेज टेस्ट पारियों में 150, 200, 250 और 300 रन हैं। उन्होंने वनडे में सबसे तेज 150 रन और 200 रन भी बनाए हैं। उन्होंने भारत की तरफ से टेस्ट क्रिकेट में पहला तिहरा शतक लगाया। 2008 और 2009 में उन्हें दो बार विजडन लीडिंग क्रिकेटर के पुरस्कार से नवाजा गया। वह यह सम्मान पाने वाले एकमात्र भारतीय क्रिकेटर हैं।


रिटायरमेंट

उन्होंने अपना आखिरी अंतर्राष्ट्रीय मैच 3 जनवरी 2013 को पाकिस्तान के खिलाफ खेला। इसके बाद वो लगातार टीम से बाहर रहे और 2015 में उन्होंने संन्यास का ऐलान कर दिया।


संन्यास के बाद

रिटायरमेंट के बाद सहवाग ने अपना एक इंटरनेशनल स्कूल खोला और वो क्रिकेट कमेंट्री भी करते हैं।

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